बलरामपुर जिलें में स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। संसाधनों की कमी के बीच करीब 150 छात्राओं को एक अधूरे और मानकों से परे भवन में स्थानांतरित कर दिया गया है, जिससे उनकी पढ़ाई और सुरक्षा दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दरअसल, वर्ष 2009 से पचपेड़वा नगर में संचालित विद्यालय को जल्दबाजी में रेहराचौकी स्थित उच्चीकृत भवन में शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन यह भवन पिछले 10 वर्षों से अधूरा पड़ा है। यहां कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई होनी है, मगर मूलभूत सुविधाओं का अभाव साफ नजर आता है।
भवन में न तो फर्श पूरी तरह तैयार है, न ही शौचालय की व्यवस्था ठीक है। खिड़की-दरवाजे तक नहीं लगे हैं। सुरक्षा के लिहाज से न बाउंड्रीवाल है और न ही सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा सोलर पैनल और नेटवर्क सुविधा के अभाव में स्मार्ट क्लास भी ठप पड़ी है।
शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित है, क्योंकि विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी है। हिंदी, सामाजिक विज्ञान और कंप्यूटर जैसे विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। पूरे छात्रावास की जिम्मेदारी सिर्फ एक प्रभारी शिक्षक पर है, जो व्यवस्था को संभालने में असमर्थ नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द व्यवस्थाएं सुधारने की मांग की है। इस विद्यालय में दूर-दराज के जनजातीय क्षेत्रों से आई छात्राएं नामांकित हैं, जो असुरक्षित माहौल में रहने को मजबूर हैं।
तेंदुए की मौजूदगी से बढ़ी चिंता
ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय के पास जंगल क्षेत्र है और परिसर के पुराने स्वास्थ्य केंद्र में कई बार तेंदुआ देखे जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में भय का माहौल है।
खंड शिक्षा अधिकारी घनश्याम वर्मा ने बताया कि इस मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है और फिलहाल शिक्षकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
