क्या है तराई का ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले एमएलके पीजी कॉलेज का अतीत?

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले मैं स्थित एमएलके पीजी कॉलेज बलरामपुर सहित आसपास के जनपदों बहराइच, गोंडा, श्रावस्ती के बीच खासा प्रचलित है इस कॉलेज में बलरामपुर जिलें से सटे नेपाल देश से भी विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते है।


एमएलके पीजी कॉलेज की स्थापना
15 अगस्त 1947 में आजादी मिलने के बाद तराई के क्षेत्र में शिक्षा की क्रांति लाने में एक चुनौती थी। ऐसे में शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए बलरामपुर रियासत के राजा स्वर्गीय महाराजा पाटेश्वरी प्रसाद सिंह जी ने 1955 में अपनी मां महारानी लाल कुंवरि जी की प्रेममयी स्मृति में एमएलके पीजी कॉलेज की स्थापना करके एक महत्वपूर्ण कदम उठाया।

क्यों कहा जाता है "तराई का ऑक्सफोर्ड"?
जिस प्रकार प्रयागराज में स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय को "पूरब का ऑक्सफोर्ड" कहा जाता है उसी प्रकार एमएलके पीजी कॉलेज को "तराई का ऑक्सफोर्ड" कहा जाता है तराई क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए गोरखपुर, प्रयागराज और अन्य जगहों पर जाना पड़ता था जब बलरामपुर रियासत ने जिलें में ही एमएलके पीजी कॉलेज की स्थापना की तो यह विद्या का मंदिर तराई के छात्रों के लिए अध्ययन-अध्यापन तथा शोध का एक मात्र केंद्र हो गया इसलिए यह कॉलेज तराई आंचल में "तराई का ऑक्सफ़ोर्ड" नाम से प्रचलित है।

किसने क्या कहा?
अगस्त 1955 में अपने उद्घाटन भाषण में तत्कालीन राज्यपाल श्री के.एम. मुंशी जी ने कहा, "एमएलके पीजी कॉलेज उन सब कॉलेजों में से एक है, जहां मैंने खुशी से संबद्धता की पेशकश की है। यह कॉलेज एक अच्छी इमारत, अच्छे आर्थिक स्रोतों और उपलब्धियों से सुसज्जित है। इसके कुछ दुर्लभ गुण हैं जो उत्तर प्रदेश के अन्य कॉलेजों में नहीं पाए जाते हैं।"
1969 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश माननीय चन्द्र भान गुप्ता ने इसके आधारिक संरचना से प्रभावित होकर कहा, "अगर मैंने पहले एमएलके पीजी कॉलेज कॉलेज को पहले देख लिया होता, तो यहां पर
गोरखपुर विश्वविद्यालय बनाया जाता।"
अप्रैल 1994 में दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए तत्कालीन H.R.D. Minister अर्जुन सिंह जी ने एमएलके पीजी कॉलेज की प्रशंसा करते हुए कहा, "मुझे पहले से ही एमएलके पीजी कॉलेज की प्रसिद्धि के बारे में पता था। आज मैं यहां आया और बहुत खुश था। मैं दिल से चाहता हूं कि यह कॉलेज यूपी में अकादमिक क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन करे।"

विश्वविद्यालय से संबंद्धता
एमएलके पीजी कॉलेज शुरू में आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध था। बाद में एमएलके कॉलेज डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय और डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या से संबद्ध हो गया। वर्तमान में यह सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थ नगर से सम्बद्ध है। जब एमएलके पीजी कॉलेज डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या से सम्बद्ध था तब अवध विश्वविद्यालय से सम्बद्ध सभी महाविद्यालयों में से यही एकमात्र महाविद्यालय था जिसे उस समय ग्रेड 'A' होने का गौरव प्राप्त हुआ था।
एमएलके पीजी कॉलेज लगातार व्याख्यान आयोजित करने और छात्रों को सांस्कृतिक और एथलेटिक कार्यक्रमों में भाग लेने के अवसर प्रदान करता रहता है इस कॉलेज में छात्रों के चतुर्दिक विकास की क्षमता थी और अभी भी यह क्षमता बनी हुई है और भावी भविष्य में यह क्षमता ऐसे ही बनी रहेगी।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थ नगर के साथ जुड़ा होने के नाते, एमएलके पीजी कॉलेज का प्रबंधन, अनुभवी संकाय सदस्यों की सक्रियता और दूरदर्शी समिति के मार्गदर्शन में गुणात्मक शिक्षा में योगदान दे रहा है न केवल कॉलेज परिवार बल्कि तराई क्षेत्र के लोग भी इस संस्था पर गर्व महसूस करते है।

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