आज देश आजादी का अमृत महोत्सव मना का है। ऐसे में जिन्होंने देश की आजादी के अपना सबकुछ न्यौछावर कर दिया आज उन्हे याद करने दिन है। हिंदुस्तान की पहली सुबह देखने वालों से बात करके जानने की कोशिश को आजादी मिलने बाद उनके खुशी का पैमाना क्या था। ऐसे लोगों ने देश की आजादी के जश्न को करते हुए न सिर्फ अपने घर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के इतिहास को भी साझा किया और इस दिन को याद करके भावुक हो गये।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बलरामपुर जिले का गौरवशाली इतिहास!
देश को स्वतंत्रता दिलाने में बलरामपुर जिले का भी गौरवशाली इतिहास हैं। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्राण कहे जाने वाले महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों महाशय भगवती प्रसाद, मौलाना अहमद जमां खां,बाबूलाल खुदर महाराज व चुन्नीलाल के अनेक क़िस्से लोंगो की जुबां पर है।
आजादी के पूर्व असहयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी भी बलरामपुर आए थे। वृद्ध सूत्र बताते है कि जब महात्मा गांधी बलरामपुर आए थे तो उनके सम्मान में बलरामपुर स्थित माया होटल को गेस्ट हाउस के रूप में खदर से सजाया गया था। क्रांतिवीरों ने महात्मा गांधी का स्वागत किया था। यहीं नहीं असहयोग आंदोलन को रफ्तार पकड़ाने के लिए बलरामपुर के लोगों ने महात्मा गांधी की आर्थिक मदद भी की थी। बलरामपुर राज परिवार द्वारा भी महात्मा गांधी को स्वर्ण मुद्राएंदी के गई थी। आजादी के इस महापर्व पर UP47wale ऐसे महान स्वंत्रता संग्राम सेनानियों को नमन करते हुए श्रद्धाजंलि अर्पित करता है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अड्डा था सेखुआ परमेश्वरी मंदिर!
बलरामपुर नगर के टेढ़ी बाजार मोहल्ले में स्थित प्राचीन सेखुआ परमेश्वरी मंदिर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अड्डा था। वहीं पर देश की आज़ादी के लिए गोपनीय बैठक करके अपनी रणनीति तैयार करते थे। देश को आज़ादी मिलने के बाद बलरामपुर में सबसे पहले इसी मंदिर पर झंडा फहराया गया था। स्वतंत्रता संग्राम पर लिखी गई पुस्तक में भी बलरामपुर के इस मंदिर का प्रमुख स्थान है जहां पर आज भी तिरंगा फहराया जाता हैं।
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