अक्षय कुमार और अभिषेक बच्चन की फिल्म 'हाउसफुल 5' थिएटर में रिलीज हो चुकी है. 5,000 से ज्यादा स्क्रीन पर रिलीज़ हुई इस फिल्म में एक बड़ा ट्विस्ट है. इस फिल्म के दो-दो क्लाइमैक्स हैं. 'हाउसफुल 5A' और 'हाउसफुल 5B' नाम से साजिद नाडियाडवाला ने दो फिल्में रिलीज की है. अब कैसी है ये फिल्म जानिए इस रिव्यू में.
थोड़ी-सी क्रिएटिव बेवकूफी’, सही टाइमिंग और ढेर सारी एनर्जी से बनी ‘हाउसफुल 5’ आपको बोर नहीं होने देती. अब अगर आप इस फिल्म को देखने गए हैं, तो जाहिर है कि एक ही चीज की उम्मीद लेकर गए होंगे – खुलकर हंसने की! और यकीन मानिए, इस बार फिल्म हंसाने के मामले में कोई कंजूसी नहीं करती. फर्स्ट हाफ के मुकाबले सेकंड हाफ थोड़ा खींचा हुआ लगता है, लेकिन फिल्म का बेमिसाल क्लाइमेक्स इस शिकायत को दूर कर देता है.
कहानी
अब बात करते हैं कहानी की, यहां मामला कुछ ऐसा है कि एक बेहद अमीर बाप (रणजीत) ने अपनी सारी दौलत अपने लाडले बेटे ‘जॉली’ के नाम कर दी है. लेकिन कहानी में ट्विस्ट ये है कि जॉली एक नहीं, पूरे तीन-तीन हैं! जलाबुद्दीन (रितेश देशमुख), जलभूषण (अभिषेक बच्चन) और जूलियस (अक्षय कुमार). असली ‘जॉली’ कौन है, ये पहेली सुलझती, उससे पहले ही एक खून हो जाता है. इस खून के बाद खूनी ढूंढ़ने के लिए जबरदस्त छानबीन शुरू हो जाती है. तो कौन है इन तीनों में से असली जॉली और कौन है खूनी? इन सवालों का जवाब आपको सीधे थिएटर में मिलेगा. लेकिन रुकिए, फिल्म की सबसे मज़ेदार बात तो अभी बाकी है इसके एक नहीं, बल्कि दो-दो क्लाइमेक्स हैं! जी हां, आप टिकट बुकिंग साइट्स पर इसे ‘हाउसफुल ए’ और ‘हाउसफुल बी’ के नाम से देख सकते हैं. यानी, आपके पास मौका है दो अलग-अलग क्लाइमेक्स देखने का, जहां दो अलग-अलग हत्यारे सामने आएंगे! हमनें ‘हाउसफुल ए’ देखी है, तो हम उस हिसाब से बात करेंगे.
एक्टिंग
फिल्म के सभी कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों को पूरी तरह से ‘जस्टिस’ दिया है. सीन के हिसाब से हर एक ने कमाल का काम किया है. अक्षय कुमार कहीं-कहीं थोड़े ‘ओवर द टॉप’ लगते हैं, पर जनाब, जब बात स्लैपस्टिक कॉमेडी की हो, तो थोड़ा ‘ओवरएक्टिंग’ तो बनता ही है! दरअसल, इस जॉनर में वही ‘ओवर द टॉप एक्टिंग’ दर्शकों को हंसाने का काम करती है. लेकिन, असली ‘मजा’ तो तब आया जब फिल्म में संजय दत्त और जैकी श्रॉफ की एंट्री हुई, उनकी ‘टाइटल-विंनिंग’ कॉमिक टाइमिंग तो ‘आउट ऑफ द पार्क’ थी! और जब बात नाना पाटेकर और जॉनी लीवर जैसे धुरंधरों की हो, तो कहने ही क्या! इनकी मौजूदगी ने ‘स्लैपस्टिक जॉनर’ को जो ‘जस्टिस’ दिया है, वो काबिले-तारीफ है. इन्होंने हर सीन में अपनी ‘कॉमिक पंच’ से दर्शकों को ‘लोटपोट’ होने पर मजबूर कर दिया. ‘लार्ड बॉबी’ यानी बॉबी देओल फिल्म का सरप्राइज फैक्टर है.
क्या है कमियां
निश्चित रूप से हाउसफुल 5 अपने वादे के मुताबिक आपका खूब मनोरंजन करती है. अपनी मल्टीस्टार कास्ट और ट्रेडमार्क स्लैपस्टिक कॉमेडी से ये फिल्म दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर देती है, लेकिन एक शिकायत जरूर है. इतने बड़े फिल्मी दिग्गजों के जमावड़े के साथ आ रही ये इतनी बड़ी फिल्म सिर्फ हंसी से कहीं ज्यादा कर सकती थी. ये एक ऐसा मंच था जहां कॉमेडी के ताने-बाने में हल्के से बुना कोई सामाजिक मुद्दा उठाया जा सकता था. आखिरकार, फिल्में अक्सर हमारी दुनिया का प्रतिबिंब होती हैं और अब सिनेमा बदल रहा है. फिर स्त्री जैसी हॉरर कॉमेडी हो या फिर लापता लेडीज जैसी हल्की फुल्की फिल्म, दोनों ने कॉमेडी के साथ एक स्ट्रॉग मैसेज दिया है. हाउसफुल 4 में वो बात नहीं नज़र आती, इसलिए आधा स्टार कम कर रहे हैं.
देखें या न देखें
आगे आपको कॉमेडी फिल्में पसंद नहीं है, तो ये फिल्म मत देखना. लेकिन अगर आप आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी से तीन घंटे का ब्रेक चाहते हैं, तनाव और चिंता के माहौल के बीच खूब हंसना चाहते हैं, तो हाउसफुल 5 आपके लिए एक ‘एंटी-स्ट्रेस’ सेशन साबित हो सकती है, जहां आपको कुछ भी सोचना नहीं है, बस अपनी सारी परेशानियां भूलकर खुलकर हंसना है.