पंजाब के पठानकोट जिले में रहने वाले भिखारी राजू के पास अपने लिए न छत है, न स्थायी ठिकाना, लेकिन दूसरों की मदद के लिए उनका जज़्बा किसी बड़े समाजसेवी से कम नहीं है। राजू अपनी भूख और तकलीफ को पीछे रखकर जरूरतमंदों की सेवा को ही अपना जीवन मानते हैं।
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राजू भिखारी भीख मांगकर जो भी पैसा जुटाते हैं, उसका इस्तेमाल अपने लिए नहीं, बल्कि गरीबों और बेसहारा लोगों की मदद में करते हैं। वह कहते हैं कि उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए जो मिलता है, वह दूसरों के काम आना चाहिए। ठिठुरती सर्द रातों में खुले आसमान के नीचे सोने वाले राजू ने हाल ही में 500 जरूरतमंदों को गर्म कंबल बांटे। खास बात यह रही कि ये कंबल उसी पैसे से खरीदे गए, जो उन्होंने भीख में इकट्ठा किया था।
राजू ने बताया कैसे कर लेते हैं ये काम
कंबल वितरण के साथ-साथ राजू ने गरीबों के लिए चाय का लंगर भी लगाया, ताकि ठंड में लोगों को कुछ राहत मिल सके। उनके इस प्रयास ने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है, खासकर ऐसे दौर में जब कई लोग सड़क पर तड़पते व्यक्ति को पानी तक देने से कतराते हैं। कई-कई दिन ढंग का खाना नसीब न होने वाले राजू का कहना है कि सेवा करने की प्रेरणा उन्हें ईश्वर से मिलती है और वह खुद को केवल एक माध्यम मानते हैं। उन्होंने आम लोगों से अपील की है कि वे आगे आकर जरूरतमंदों की मदद करें, क्योंकि समाज तभी मजबूत बनता है जब सब एक-दूसरे का सहारा बनें।
मन की बात में पीएम ने किया था जिक्र
राजू भिखारी की निस्वार्थ सेवा की सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में कर चुके हैं। केंद्र सरकार की ओर से उन्हें जो आश्रय दिया गया था, उसका इस्तेमाल उन्होंने खुद के लिए नहीं किया, बल्कि उसे भी गरीब और बेघर लोगों के ठहरने की जगह बना दिया। राजू भिखारी आज समाज के लिए एक मिसाल हैं। उनकी जीवन कहानी यह संदेश देती है कि सच्ची इंसानियत पद, पैसा या सुविधाओं से नहीं, बल्कि दूसरों के लिए जीने की भावना से पहचानी जाती है।
