Balrampur News: दुधवा मॉडल पर विकसित होगी जंगल सफारी, जल्द ही हो सकती हैं घोषणा

देवीपाटन मंडल के सोहेलवा वन्य जीव अभ्यारण्य में बलरामपुर जिले के जरवा इलाके में इको-टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया है, जिससे पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है। घने जंगलों की हरियाली, स्वच्छ आबोहवा और नेपाल की पहाड़ियों का दृश्य सैलानियों के लिए विशेष आकर्षण बन रहा है। टाइगर रिजर्व के लिए संघर्ष कर रहे सर्वेश सिंह ने बताया कि इससे स्थानीय लोगों के लिए भी रोजगार के नए अवसर खोल रही है। 








पर्यटन संभावनाओं को देखते हुए यहां जंगल सफारी, होम-स्टे, बर्ड सिटिंग प्वाइंट, नेचर ट्रैक और बोटिंग जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। मॉडल के रूप में दुधवा राष्ट्रीय उद्यान की तर्ज पर इको-टूरिज्म ढांचा खड़ा करने की तैयारी है। जंगल से सटे गांवों के लोगों को छोटे कॉटेज व होम-स्टे बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे स्थानीय आबादी की आय में वृद्धि होगी। वन क्षेत्र में लगभग 10 किलोमीटर लंबा नेचर ट्रैक विकसित करने की योजना है, जहां पर्यटक सुरक्षित दूरी से लंगूर, हिरन, भालू, बिज्जू, साही सहित अन्य वन्यजीवों को देख सकेंगे। यह ट्रैक पर्यावरण शिक्षा और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण बनेगा।


टाइगर रिजर्व घोषित करने के पूरे होते हैं मानक


टाइगर रिजर्व की मान्यता नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की सिफारिश पर मिलती है। तय मानक को सोहेलवा वन्यजीव अभ्यारण्य अब पूरा करता है।


जंगल का क्षेत्र सामान्यतः 300–500 वर्ग किमी या उससे अधिक क्षेत्र उपयुक्त माना जाता है।


कोर और बफर जोन का निर्धारण


बाघों की मौजूदगी के वैज्ञानिक प्रमाण आवश्यक होते हैं। केवल अनुमान नहीं, बल्कि दस्तावेजी साक्ष्य जरूरी है।


जैव विविधता और शिकार प्रजातियां का होना। ताकि बाघों के लिए प्राकृतिक भोजन शृंखला बनी रहे।


जंगल में स्थायी वॉटर होल, नदियां या तालाब हों तथा घास के मैदान (ग्रासलैंड) मौजूद हों।


कोर क्षेत्र में गांवों की संख्या कम हो या पुनर्वास की योजना हो, ताकि बाघों का प्राकृतिक मूवमेंट बाधित न हो।

एंटी-पोचिंग कैंप, वन रक्षक, ड्रोन/कैमरा ट्रैप, पेट्रोलिंग सिस्टम जैसी मजबूत सुरक्षा प्रणाली जरूरी है।


परीक्षण के बाद आगे बढ़ेगी योजना


सोहेलवा वन्यजीव अभ्यारण्य सभी मानक पूरे करता है। इसकी रिपोर्ट भी बन चुकी है। अब एक अध्ययन इस बात का होना है, कि टाइगर रिजर्व से फायदा क्या होगा और इससे दुष्प्रभाव क्या हो सकता है। आम लोगों की सुरक्षा और संरक्षण के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं का सर्वे जल्द ही पूरा होगा - गौरव गर्ग, जिला प्रभागीय वनाधिकारी

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