Balrampur News: ​अब आत्मनिर्भर बनेंगी बेटियाँ: GIC की शिक्षा और ITI के हुनर से मिलेगी सपनों को नई उड़ान

बलरामपुर जिलाधिकारी ने तहसील सदर के ग्राम घुघुलपुर में 4.18 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे राजकीय बालिका इंटर कॉलेज का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया कि अप्रैल माह तक समस्त कार्य पूर्ण कर भवन का हैंडओवर करें, ताकि नए शैक्षणिक सत्र से छात्राओं की पढ़ाई शुरू कराई जा सके। डीएम ने कहा कि यह कॉलेज क्षेत्र की बालिकाओं को इंटर स्तर तक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराएगा, जिससे उन्हें दूर के विद्यालयों में जाने की मजबूरी नहीं रहेगी और ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी।





बलरामपुर जिले में बालिकाओं को माध्यमिक और तकनीकी शिक्षा की बेहतर सुविधा के लिए निर्माणाधीन दो परियोजनाओं को जल्द शुरू कराने की दिशा में प्रशासन ने तेजी बढ़ा दी है। वर्ष 2015 में स्वीकृत राजकीय महिला आईटीआई (गनवरिया) और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (घुघुलपुर) का जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने शनिवार को निरीक्षण किया समयबद्ध ढंग से निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।


जिलाधिकारी ने कक्षाओं, प्रशासनिक कक्ष,पेयजल व्यवस्था तथा परिसर विकास कार्यों का अवलोकन किया और गुणवत्ता के साथ कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित अधिकारियों को शिक्षकों की नियुक्ति, फर्नीचर और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था के लिए शासन स्तर पर समानांतर कार्रवाई करने को कहा। जिलाधिकारी ने विकास खंड हरैया सतघरवा के ग्राम गनवरिया में 12.60 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन राजकीय महिला आईटीआई का निरीक्षण किया। मई तक सभी निर्माण कार्य पूर्ण कर भवन का हैंडओवर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि अगस्त 2026 से इस संस्थान में प्रशिक्षण शुरू कराने की तैयारी की जाए, जिससे बालिकाओं को तकनीकी शिक्षा और रोजगारपरक प्रशिक्षण का अवसर मिल सके जिलाधिकारी ने कहा कि महिला आईटीआई शुरू होने से सिलाई, फैशन डिजाइनिंग, इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर जैसे ट्रेड में प्रशिक्षण मिलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और बालिकाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी। उन्होंने निर्माण कार्य में गुणवत्ता बनाए रखने और शेष कार्य तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।


डीएम ने कहा कि दोनों संस्थानों के शुरू होने से जिले में महिला शिक्षा को नई दिशा मिलेगी। माध्यमिक शिक्षा से लेकर तकनीकी प्रशिक्षण तक की सुविधा उपलब्ध होने से बालिकाओं की पढ़ाई में निरंतरता आएगी और उन्हें उच्च शिक्षा व रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।

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