बलरामपुर जिले में संजय सेतु की बंदी का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। पुल बंद होने के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है, जिससे आम लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लंबा रास्ता तय करने की मजबूरी ने न केवल समय बढ़ाया है, बल्कि किराया और माल भाड़ा भी महंगा कर दिया है।
सबसे बड़ा असर पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति पर पड़ा है। दूरी बढ़ने के कारण तेल टैंकर समय पर जिले तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। स्थिति यह है कि 17 अप्रैल तक जिले के 88 पेट्रोल पंपों में से 46 पर पेट्रोल और 33 पर डीजल खत्म हो चुका था। कई पंपों पर लोग घंटों इंतजार करने के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं। जिला प्रशासन ने राहत के तौर पर पचपेड़वा और गैसड़ी क्षेत्र में देवरिया के बैतालपुर डिपो से आपूर्ति शुरू कराई है, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों की परेशानी बढ़ गई है। किसान डीजल के लिए गैलन लेकर पंपों पर बैठे नजर आ रहे हैं, जबकि आम लोग एक पंप से दूसरे पंप तक भटक रहे हैं। हरैया सतघरवा, उतरौला और बहराइच मार्ग के कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन की किल्लत बनी हुई है।
यात्रियों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहले बलरामपुर से लखनऊ तक का सफर 167 किलोमीटर और 231 रुपये में पूरा हो जाता था, लेकिन अब अयोध्या मार्ग से 244 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है, जिसके लिए 370 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। समय भी बढ़ गया है, जिससे लोगों को पहले ही यात्रा की योजना बनानी पड़ रही है।
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इधर, परिवहन लागत बढ़ने का असर सब्जियों की कीमतों पर भी पड़ा है। टमाटर, जो पहले 15 रुपये किलो मिलता था, अब 60 रुपये तक पहुंच गया है। बैगन 100 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि प्याज के दाम भी दोगुने से ज्यादा हो गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि बढ़े हुए भाड़े के कारण मंडी से ही महंगा माल मिल रहा है।
कुल मिलाकर, संजय सेतु की बंदी ने बलरामपुर में दैनिक जीवन को प्रभावित कर दिया है। ईंधन संकट, महंगाई और बढ़ती दूरी ने आम जनता की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
