बलरामपुर। वर्षों से सुआंव नाला के नाम से जानी जाने वाली जलधारा को अब प्रशासनिक तौर पर “सुआंव नदी” का दर्जा दे दिया गया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन और जिला गंगा समिति ने राजस्व अभिलेखों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब सरकारी दस्तावेजों, नक्शों और विभागीय रिकॉर्ड में इसे सुआंव नदी के नाम से दर्ज किया जाएगा।
एनजीटी में चल रहे वाद संख्या 433/2022 में 15 जनवरी 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में यह निर्णय लिया गया। एनजीटी ने बलरामपुर और सिद्धार्थनगर प्रशासन को नदी के सक्रिय बाढ़ क्षेत्र की पहचान करने, अतिक्रमण रोकने और नदी संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
करीब 120 किलोमीटर लंबी सुआंव नदी का उद्गम गोपियापुर क्षेत्र के अड़ारपाकड़ गांव की झील से माना जाता है और इसका संगम उतरौला तहसील के रसूलाबाद के पास राप्ती नदी में होता है। शहर के बीच से गुजरने वाली इस नदी के पुनर्जीवन को लेकर प्रशासन ने कई योजनाएं तैयार की हैं। नदी का सीमांकन कर चौड़ीकरण किया जाएगा, किनारों से अतिक्रमण हटाया जाएगा और तटबंध निर्माण के साथ बड़े स्तर पर पौधरोपण कराया जाएगा।
वन विभाग नदी किनारे हरित पट्टी विकसित करेगा, जिससे मिट्टी कटान रोका जा सके और जैव विविधता को बढ़ावा मिले। साथ ही ड्रेनेज सिस्टम को वैज्ञानिक ढंग से नदी से जोड़े जाने की योजना बनाई जा रही है ताकि गंदे पानी का अनियंत्रित बहाव रोका जा सके।
एनजीटी ने बलरामपुर चीनी मिल और बजाज मिल जैसी औद्योगिक इकाइयों को भी सीएसआर मद से नदी संरक्षण कार्यों में सहयोग देने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि यह केवल नाम बदलने का फैसला नहीं, बल्कि नदी के अस्तित्व और पर्यावरणीय महत्व को आधिकारिक मान्यता देने की पहल है।
