भारत-नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर जिले में दोहरी पहचान और फर्जी दस्तावेजों का मामला सामने आया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर थाना जरवा पुलिस ने नेपाल के 27 नागरिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि इन लोगों के नाम भारत और नेपाल, दोनों देशों की मतदाता सूची में दर्ज हैं। साथ ही भारतीय आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज बनवाकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की भी बात सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, जिलाधिकारी कार्यालय से प्राप्त सूची के आधार पर उपनिरीक्षक शंभू सिंह ने अभिलेखों की जांच और स्थानीय स्तर पर सत्यापन कराया। जांच के बाद 3 जुलाई को थाना जरवा में संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि अधिकांश नामित लोगों का मूल निवास नेपाल के जिला डांग स्थित कोईलाबास क्षेत्र का है, जबकि भारत में उन्होंने बलरामपुर जिले के बालापुर (अनवरडीह), शीतलापुर, रिजवान गली और नई बाजार जैसे पते दर्ज कराए। इन्हीं पतों के आधार पर भारतीय पहचान संबंधी दस्तावेज जारी होने और मतदाता सूची में नाम दर्ज होने की बात कही गई है।
एफआईआर में कई लोगों के नाम शामिल हैं, जिनके भारत और नेपाल दोनों देशों की मतदाता सूची में दर्ज होने का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा कुछ लोगों पर आधार कार्ड और अन्य भारतीय दस्तावेज हासिल करने के भी आरोप लगाए गए हैं।
जांच के दौरान दो अहम तथ्य भी सामने आए। एक व्यक्ति सत्यापन के दौरान बताए गए पते पर नहीं मिला, जबकि दूसरे व्यक्ति की कुछ महीने पहले मृत्यु हो चुकी है, इसके बावजूद उसका नाम संबंधित अभिलेखों में दर्ज पाया गया।
पुलिस का कहना है कि अब मामले की विस्तृत विवेचना की जा रही है। मतदाता सूची, आधार कार्ड, निवास प्रमाणपत्र, राशन कार्ड और सरकारी योजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभागों से दस्तावेज भी मांगे जाएंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भारतीय पहचान पत्र किन आधारों पर जारी किए गए और उनका किस प्रकार उपयोग किया गया।
प्रभारी निरीक्षक योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, खुली भारत-नेपाल सीमा को देखते हुए प्रशासन ने सीमा क्षेत्र में पहचान संबंधी दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया भी तेज कर दी है।
