बलरामपुर में नामांतरण प्रक्रिया में देरी और जिलाधिकारी के कार्य-व्यवहार से नाराज अधिवक्ताओं का आंदोलन तेज हो गया है। बुधवार को सदर तहसील से पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे अधिवक्ताओं की पुलिस से नोकझोंक हुई। करीब आधे घंटे तक परिसर में प्रदर्शन के बाद अधिवक्ता संघ भवन लौट गए। हालांकि, अपनी मांगों पर सहमति नहीं बनने से उन्होंने आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि ऑनलाइन दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों में देरी हो रही है और उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। इसको लेकर संयुक्त बार एसोसिएशन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अधिवक्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बन गई।
डीएम के चैंबर के बाहर धरने पर बैठे अधिवक्ता
कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद आक्रोशित अधिवक्ता डीएम के चैंबर के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रशासन की ओर से उन्हें समझाने और बातचीत के जरिए मामला सुलझाने की कोशिश की गई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।
अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक ऑनलाइन दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों का समाधान नहीं होता और उनके साथ हुए व्यवहार को लेकर जवाबदेही तय नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने जिलाधिकारी को पद से हटाने और पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग भी उठाई है।
मुख्यमंत्री समेत उच्चाधिकारियों को भेजा ज्ञापन
कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलेश्वर सिंह के मुताबिक, अधिवक्ता कई दिनों से नामांतरण प्रक्रिया में देरी और जिलाधिकारी के कार्य-व्यवहार के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। इस संबंध में राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की गई है।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल से डीएम ने ज्ञापन स्वीकार करने के बजाय दूरी बना ली थी। इसी घटना के बाद विरोध और तेज हो गया। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह मामला केवल उनकी मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि अधिवक्ता समुदाय के सम्मान से भी जुड़ा है।
22 अक्तूबर को फिर होगा प्रदर्शन
संयुक्त बार एसोसिएशन ने 22 अक्तूबर को दोबारा जिलाधिकारी के घेराव और न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया है। अधिवक्ता सुबह 11 बजे सदर तहसील से पैदल मार्च निकालकर दीवानी न्यायालय के रास्ते कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे। इस प्रदर्शन में उतरौला और तुलसीपुर बार संघों के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं के भी शामिल होने की संभावना है।
जिला बार एसोसिएशन के महामंत्री संजय तिवारी और कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलेश्वर सिंह ने जिला जज को पत्र भेजकर न्यायिक कार्य से विरत रहने की सूचना दी है। प्रदर्शन के बाद संघ भवन में बैठक कर आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।
वार्ता के लिए तैयार है जिला प्रशासन
जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने कहा कि जिला प्रशासन अधिवक्ताओं के साथ सार्थक वार्ता करने के लिए तैयार है। बुधवार को अधिवक्ताओं के कलेक्ट्रेट पहुंचने की जानकारी मिलने पर वह स्वयं उनका पक्ष सुनने आए थे, लेकिन अधिवक्ता बिना बातचीत किए लौट गए।
डीएम के अनुसार, धारा 34 से जुड़े मामलों का नियमानुसार समाधान आपसी संवाद और समन्वय के माध्यम से निकाला जा सकता है। उन्होंने बताया कि 17 अक्तूबर को वह तुलसीपुर में संपूर्ण समाधान दिवस में मौजूद थे और प्रशासन इस प्रकरण पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने के लिए तैयार है।
यह भी पढ़ें: धारा 34 के मामले में अधिवक्ताओं से वार्ता को तैयार बलरामपुर जिला प्रशासन, डीएम बोले— संवाद से निकलेगा समाधान
हड़ताल से न्यायालय और रजिस्ट्री का काम प्रभावित
अधिवक्ताओं की हड़ताल का असर आम लोगों पर भी पड़ रहा है। उतरौला में बुधवार को न्यायालयों में कामकाज नहीं हुआ और रजिस्ट्री कार्यालय में भी बैनामों का पंजीकरण नहीं हो सका। इससे मुकदमों की पैरवी और जमीन-जायदाद की खरीद-बिक्री के लिए पहुंचे लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।
दुदरा के राजेश श्रीवास्तव जरूरी काम से बैनामा कराने पहुंचे थे, लेकिन काम नहीं हो सका। वहीं, पेहर से आए गुलाम मोहम्मद ने बताया कि वह जमीन बेचने के लिए एक सप्ताह से चक्कर लगा रहे हैं। जमीन खरीदने के लिए मुंबई से आए व्यक्ति को भी काम न होने के कारण लौटना पड़ा। इसके अलावा, जमीन विवाद से संबंधित अपील की सुनवाई नहीं होने से भी लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
फिलहाल, अधिवक्ता अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि जिला प्रशासन बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की बात कह रहा है। ऐसे में 22 अक्तूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन पर सभी की नजरें टिकी हैं।
