रुसी स्पेस एजेंसी रोस्कोस्मोस ने 1976 के बाद पहली बार चांद पर अपना मून मिशन भेजा है, यानी पूरे 47 सालों के बाद रूस ने लूना -25 लैंडर को अमूर क्षेत्र में वोस्तोचन अंतरिक्ष बंदरगाह से सुबह 8:10 मिनट (स्थानीय समय) पर लॉन्च किया है। AP की रिपोर्ट के मुताबिक रूसी वैज्ञानिकों का मानना है कि लूना-25 आने वाले 21 अगस्त तक चांद के साउथ पोल पर उतरेगा। और इस तरह रूस भारत से दो दिन पहले ही अपना लूना-25 को चांद की सतह पर उतार देगा। आपको बताते चलें कि रूस का लूना-25 कल यानी 11 अगस्त 2023 को ही लॉच होने के बाद मात्र 10 दिनों में ही चाँद पर पहुँच जाएगा।
लूना-25 लैंडर को पूरी तरह से रूस में ही बनाया गया है ये पहली बार है, जब रूस ने मून मिशन के लिए सारी तैयारी खुद की है। इससे पहले USSR सितंबर 1958 और अगस्त 1976 के बीच 24 लूना मिशन लॉन्च कर चुका है। वहीं अगर लूना-25 सफलतापूर्वक चांद पर उतरता है तो वो भारत के चंद्रयान-3 से दो दिन पहले लैंड कर जाएगा।
तीन देश ही चांद पर सफल लैंडिंग में कामयाब!
अब तक के इतिहास में केवल तीन देश ही चांद पर सफल लैंडिंग में कामयाब रही हैं. इनमें सोवियत संघ (USSR), अमेरिका और चीन। भारत और रूस ने चंद्रमा के साउथ पोल पर सबसे पहले उतरने का लक्ष्य रखा है। रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने कहा कि वह दुनिया को यह दिखाना चाहती है कि रूस चंद्रमा पर पेलोड पहुंचाने में सक्षम है। रूस चांद की सतह तक पहुंचने की गारंटी भी देता है। रूस को यह विश्वास भी है कि उसका लूना-25 मिशन सफलतापूर्वक कामयाब होगा।
अभी तक कहाँ पहुँचा है भारत का चंद्रयान-3!
भारत का चन्द्रयान-3 चाँद की सबसे निचले ऑर्बिट में प्रवेश करने की बाद चाँद का चक्कर लगाते हुए 23 अगस्त की शाम 5:47 मिनट के आसपास चाँद की सतह पर उतरेगा।
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