Sonam Wangchuk News: लेह में हुई हिंसा और उसके बाद पर्यावरण कार्यकर्ता पर गृहमंत्रालय द्वारा लगे आरोप के बीच सीबीआई पूरे मामले की जांच कर रही है. वांगचुक पर आरोप पाकिस्तान से कनेक्शन के भी लगे हैं और उनकी फंडिग भी संदेह के घेरे में आ गई है. इस बीच लद्धाख के डीजीपी एसडी सिंह जामवाल ने कहा कि पुलिस वांगचुक के कथित पाकिस्तानी कनेक्शन की भी जांच कर रही है.
दरअसल, लद्दाख के डीजीपी जामवाल ने लेह में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हमने हाल ही में एक पाकिस्तानी पीआईओ (खुफिया ऑपरेटिव) को गिरफ्तार किया है जो उनके बारे में रिपोर्टिंग कर रहा था. डीजीपी ने सोनम वांगचुक की पाकिस्तान यात्रा को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान में डॉन के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे. इसलिए उन पर बड़ा सवालिया निशान है.
उनकी गतिविधियां संदिग्ध हैं
डीजीपी ने कहा अब तक जांच में जो सामने आया है, उसे फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया जा सकता. लेकिन वांगचुक के भाषणों और गतिविधियों से यह साफ है कि उनकी मंशा लोगों को भड़काने की थी. उन्होंने ‘अरब स्प्रिंग’ और नेपाल, बांग्लादेश व श्रीलंका में हुए आंदोलनों का जिक्र कर लोगों को उकसाया.
उन्होंने बताया कि विदेशी फंडिंग और एफसीआरए उल्लंघन की भी जांच की जा रही है. एक पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव को पकड़ा गया है, जो वांगचुक के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के वीडियो पाकिस्तान भेज रहा था.
लेह में अचानक ये हिंसा क्यों भड़की?
अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करके जम्मू कश्मीर राज्य का पुनर्गठन किया गया. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांटा गया. इसमें जम्मू-कश्मीर को विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया. वहीं, लद्दाख को बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया. इस बदलाव के तहत जम्मू कश्मीर में पिछले साल नई विधानसभा का भी गठन हो गया. वहीं, दूसरी ओर राज्य पुनर्गठन के साथ ही लद्दाख में इस केंद्र शासित प्रदेश को छठी अनुसूची में शामिल करने और इसे पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग उठने लगी. इसे लेकर अलग-अलग समय पर प्रदर्शन हुए. इन्हीं मांगो को लेकर चल रहे ताजा प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी.
