बलरामपुर में मुख्यमंत्री अभ्युदय स्कूल निर्माण को मिली जमीन, जल्द शुरू होगा काम

बलरामपुर सदर विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री अभ्युदय स्कूल के निर्माण का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है। विद्यालय के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान कर ली गई है और इससे जुड़ा प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। चिन्हित जमीन उद्यान विभाग की है, जिस पर निर्माण के लिए विभागीय अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) का इंतजार किया जा रहा है। एनओसी मिलते ही स्कूल निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।







प्री-नर्सरी से 12वीं तक होगी पढ़ाई

मुख्यमंत्री अभ्युदय स्कूल में प्री-नर्सरी से लेकर कक्षा 12 तक की पढ़ाई कराई जाएगी। इस स्कूल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को कॉन्वेंट स्कूल जैसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसी लक्ष्य के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रत्येक जिले में मुख्यमंत्री अभ्युदय स्कूल खोलने का निर्णय लिया है।


पहले चरण में जिले को मिलेंगे दो अभ्युदय स्कूल

पहले चरण में बलरामपुर जिले में दो मुख्यमंत्री अभ्युदय स्कूल बनाए जाने हैं। उतरौला तहसील में एक स्कूल का निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है। वहीं सदर ब्लॉक में लंबे समय से जमीन की तलाश चल रही थी। बीईओ सदर अशोक पाठक के अनुसार, पहले प्रस्तावित भूमि दो अलग-अलग हिस्सों में होने के कारण निरस्त कर दी गई थी।


अब सेखुईकला गांव में आश्रम पद्धति विद्यालय के पास पांच एकड़ से अधिक भूमि चिन्हित की गई है। यह जमीन उद्यान विभाग की है, इसलिए विभागीय एनओसी के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।


आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा विद्यालय

मुख्यमंत्री अभ्युदय स्कूल का निर्माण न्यूनतम पांच एकड़ भूमि में किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 24 करोड़ रुपये खर्च होंगे। स्कूल में कुल 30 कक्ष होंगे, जिनमें करीब 2000 विद्यार्थियों के अध्ययन की व्यवस्था होगी।


विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए— विज्ञान प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब, समृद्ध पुस्तकालय, डिजिटल स्टडी सेंटर, स्मार्ट क्लासरूम जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे छात्रों को कॉन्वेंट स्कूल जैसी शिक्षा का अनुभव मिल सके।


एनओसी मिलते ही शुरू होगा निर्माण कार्य

इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शुभम शुक्ल ने बताया कि स्कूल के लिए जमीन पूरी तरह चिन्हित कर ली गई है। उद्यान विभाग की भूमि के लिए एनओसी का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। अनुमति मिलते ही निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। इस स्कूल के बनने से क्षेत्र के गरीब और कमजोर वर्ग के छात्रों को शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे।

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