उत्तर प्रदेश के देवीपाटन मंडल में जंगलों की पहचान बन चुका सोहेलवा वन्यजीव अभयारण्य उत्तर प्रदेश का पांचवां टाइगर रिजर्व बनने का इंतजार पूरा होने वाला है। लगभग 452 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले इस वन क्षेत्र में 232 वर्ग किमी को कोर एरिया और 220 वर्ग किमी को बफर जोन के रूप में नामित किया गया है। जंगल का सर्वे कार्य भी पूरा हो चुका है।
बीते वर्ष अप्रैल में हुई बाघ जनगणना की रिपोर्ट में पहली बार सोहेलवा में बाघों के फोटोग्राफिक प्रमाण मिलने से इसकी दावेदारी और मजबूत हुई है। इस बार हुए सर्वे की रिपोर्ट भी बनी है। अब सिर्फ एक अध्ययन टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद होने वाले बदलाव और प्रभाव का होना है। इसके लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को प्रस्ताव भेजा गया है।
वर्ष 2022 की गणना में तीन बाघों की मौजूदगी दर्ज होने के बाद वन विभाग ने तैयारी शुरू की। वास्तविक संख्या का सटीक आकलन करने के लिए जनवरी 2026 में पुनः सर्वे हुआ, जो आठ फरवरी तक तीन चरणाें में चला। इसके लिए 700 से अधिक ट्रैकिंग कैमरे लगाए गए। सर्वे टीम सभी रिपोर्ट के साथ दिल्ली लौट गई है। सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग के तुलसीपुर, रामपुर, भाभर, बरहवा, पश्चिमी सोहेलवा, पूर्वी सोहेलवा समेत सातों रेंज क्षेत्रों में आर्थिक व सामाजिक सर्वेक्षण पूरा हो गया है।
दिल्ली स्थित ग्लोबल टाइगर फोरम की तीन सदस्यीय टीम ने लगभग एक माह तक सीमावर्ती गांवों और वन क्षेत्रों में रहकर विस्तृत अध्ययन किया। इस सर्वे का उद्देश्य जंगलों पर ग्रामीण निर्भरता, वन्यजीवों की मौजूदगी, वन संपदा की स्थिति और मानव-वन्यजीव संबंधों की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट तैयार करना था। माना जा रहा है कि टाइगर रिजर्व घोषित किए जाने की प्रक्रिया मार्च 2026 तक आगे बढ़ेगी।
