बलरामपुर में पेट्रोल-डीजल की किल्लत से जनजीवन प्रभावित, शादियों में भी पड़ रहा असर

बलरामपुर जिले में पेट्रोल-डीजल की किल्लत ने अब आम जनजीवन के साथ-साथ शादी-विवाह जैसे आयोजनों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। सहालग के इस व्यस्त दौर में बरात और विदाई जैसे कार्यक्रमों में देरी की घटनाएं सामने आ रही हैं। बुधवार को जैसे ही पेट्रोल पंपों पर तेल पहुंचा, लंबी-लंबी कतारें लग गईं और लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा।





आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव का मुख्य कारण घाघराघाट मार्ग पर वाहनों का प्रतिबंध बताया जा रहा है। इससे लखनऊ डिपो से आने वाले टैंकरों को अयोध्या और सीतापुर के रास्ते भेजा जा रहा है, जिससे सप्लाई में देरी हो रही है। हालात संभालने के लिए पचपेड़वा और गैसड़ी क्षेत्र के पंपों की आपूर्ति देवरिया के बैतालपुर डिपो से कराई जा रही है।


ईंधन संकट का असर सीधे शादी समारोहों पर दिख रहा है। लखनऊ से बरात लेकर आए प्रमोद कुमार को विदाई के समय डीजल खत्म होने के कारण बीच में रुकना पड़ा और उन्हें लाइन में लगकर ईंधन भरवाना पड़ा। वहीं सत्यम सिंह ने बताया कि लगातार आना-जाना होने के बावजूद पेट्रोल नहीं मिल पा रहा है। कुछ लोगों ने कालाबाजारी का भी आरोप लगाया, जिसमें पेट्रोल 150 से 200 रुपये प्रति लीटर तक बेचे जाने की बात कही गई।


ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी चिंताजनक रही। हरैया सतघरवा के गुगौली कला पेट्रोल पंप पर ईंधन खत्म होने से बैरिकेडिंग करनी पड़ी, जबकि बरदौलिया और मणिपुर क्षेत्र में रात से ही भीड़ उमड़ी रही। कई लोग घंटों लाइन में खड़े रहने के कारण अस्वस्थ भी हो गए। गौरा क्षेत्र में एक शादी के दौरान पेट्रोल खत्म होने से बारातियों के वाहन रास्ते में ही रुक गए, जिससे विदाई में काफी देर हुई।


आंकड़ों के अनुसार, 15 से 21 अप्रैल के बीच जिले में पेट्रोल-डीजल की खपत सामान्य से लगभग दोगुनी रही। जहां आम दिनों में रोजाना करीब 92 हजार लीटर पेट्रोल और 1.41 लाख लीटर डीजल की खपत होती है, वहीं इन दिनों यह आंकड़ा काफी बढ़ गया। प्रशासन और तेल कंपनियां लगातार आपूर्ति बढ़ाकर स्थिति सामान्य करने की कोशिश में जुटी हैं, फिर भी कई पंपों पर बार-बार स्टॉक खत्म होने की समस्या बनी रही।


स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन ने नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत अब सभी पेट्रोल पंप सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक ही खुलेंगे। साथ ही बोतल, डिब्बा या जेरीकेन में पेट्रोल-डीजल देने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। किसानों को केवल कृषि कार्य के लिए सीमित मात्रा में डीजल निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराया जाएगा।


फिलहाल, प्रशासन के प्रयास जारी हैं, लेकिन आम लोगों को अभी भी राहत का इंतजार है।

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