नेपाल के पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर एक बार फिर बलरामपुर के सीमावर्ती इलाकों में देखने को मिला। सोमवार को हरैया सतघरवा और महराजगंज तराई क्षेत्र के कई पहाड़ी नालों में तेज उफान आ गया, जिससे करीब 24 गांवों का संपर्क ब्लॉक मुख्यालय, अस्पताल, बैंक और स्कूलों से कट गया।
हरैया सतघरवा के उदईपुर-खैरहनिया स्थित खैरहनिया पहाड़ी नाले में अचानक जलस्तर बढ़ने से दोनों ओर लोगों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। स्कूली बच्चे, मरीज और रोजमर्रा के काम से निकलने वाले ग्रामीण घंटों पानी कम होने का इंतजार करते रहे। ग्रामीणों का कहना है कि भुजेहरा, खैरहनिया, गंजड़ी, नारायणापुर, नवीनगर, धनौढ़ा, सर्रा, वेदनगर, गनवरिया और पूरनपुर समेत कई गांवों के हजारों लोगों के लिए यही एकमात्र प्रमुख संपर्क मार्ग है।
ग्रामीणों ने बताया कि हर बरसात में यही स्थिति बनती है। पुल निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। सबसे अधिक परेशानी बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों को उठानी पड़ती है।
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वहीं महराजगंज तराई के रामगढ़ मैटहवा गांव में बाढ़ का पानी तो उतर गया, लेकिन गांव में कीचड़ और गंदगी फैल गई है। इससे डायरिया, बुखार और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। सोमवार को उप जिलाधिकारी राकेश कुमार जयंत, खंड विकास अधिकारी सुनील कुमार आर्य और नायब तहसीलदार शिवेंद्र पटेल ने गांव पहुंचकर हालात का निरीक्षण किया और प्रभावित परिवारों से बातचीत की।
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि खरझार पहाड़ी नाले पर बना लगभग 240 मीटर लंबा तटबंध कट जाने के कारण हर साल गांव बाढ़ की चपेट में आ जाता है। उन्होंने तटबंध के पुनर्निर्माण की मांग करते हुए कहा कि जब तक स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक यह समस्या हर मानसून में बनी रहेगी।
