बलरामपुर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए देवीपाटन मंदिर और सोहेलवा वन्यजीव क्षेत्र को नए रूप में विकसित किया जा रहा है। देवीपाटन मंदिर के विकास के लिए 42.50 करोड़ रुपये की योजना पर काम हो रहा है, जबकि सोहेलवा में ईको-टूरिज्म के साथ लेपर्ड सफारी विकसित करने की तैयारी है।
देवीपाटन मंदिर के आसपास पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए 50 एकड़ जमीन खरीदी गई है। मंदिर मार्ग पर हरैया तिराहे के पास रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज का निर्माण भी चल रहा है। नवरात्र के दौरान यहां देश-विदेश से करीब 10 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं।
सोहेलवा में लेपर्ड सफारी की तैयारी
सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग को लेपर्ड सफारी के रूप में विकसित करने की योजना को मंजूरी मिल चुकी है। कैमरा ट्रैप से की गई गणना में यहां 150 से अधिक तेंदुए दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा बाघ, भालू, चीतल, सांभर और नीलगाय समेत कई वन्यजीव यहां पाए जाते हैं।
सोहेलवा में 400 से अधिक पक्षी प्रजातियां भी मौजूद हैं। सर्दियों में मध्य एशिया, तिब्बत, लद्दाख और दक्षिण साइबेरिया से प्रवासी पक्षी भी यहां पहुंचते हैं।
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रामपुर रेंज के जरवा में दारा नाला के पास विकसित ईको-टूरिज्म स्थल पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 6 नवंबर 2024 को शुरू हुए इस स्थल पर अब तक तीन लाख से अधिक पर्यटक पहुंच चुके हैं। यहां से नेपाल के पहाड़ों का नजारा भी दिखाई देता है।
ईको-टूरिज्म स्थल पर थारू कैफे आकर्षण
पर्यटकों के लिए दारा नाला के किनारे थारू कैफे भी संचालित है, जहां थारू समुदाय के पारंपरिक व्यंजन उपलब्ध हैं। इससे बलरामपुर में धार्मिक पर्यटन के साथ प्रकृति, वन्यजीव और स्थानीय संस्कृति आधारित पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
