Kolkata News : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 की शाम भगदड़ की दर्दनाक घटना सामने आई. महासप्तमी के अवसर पर पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे. इसी दौरान भारी बारिश और भीड़ के दबाव के बीच अफरा-तफरी मच गई. इस हादसे में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 40 लोग घायल बताए गए हैं. घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है.
कैसे मची चोरबागान में भगदड़?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम करीब 7:40 बजे उत्तर कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल के निकास द्वार के पास यह घटना हुई. उस समय इलाके में बारिश हो रही थी और पंडाल के आसपास श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद थी.
बारिश के बीच लोगों की आवाजाही बढ़ने और सीमित रास्तों पर भीड़ का दबाव बनने से स्थिति बिगड़ गई. बताया जा रहा है कि अचानक भीड़ के एक साथ आगे बढ़ने से लोग एक-दूसरे से टकराने लगे और कुछ लोग गिर पड़े. इसके बाद वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई. भीड़ के दबाव में कई लोगों को सांस लेने में परेशानी हुई और कुछ लोग बेहोश हो गए.
राहत और बचाव कार्य में जुटा प्रशासन
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और राहतकर्मी मौके पर पहुंचे. घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया. चोरबागान पंडाल को बंद कराकर वहां मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की कार्रवाई की गई. हादसे के बाद प्रशासन ने घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी.
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घटना पर दुख जताया और मामले की जांच कराने की बात कही. पुलिस ने आयोजन समिति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया. हादसे के वास्तविक कारणों और संभावित लापरवाही की जांच की जा रही है.
मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए सहायता की घोषणा
राज्य सरकार ने मृतकों के प्रत्येक परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की. घायलों को 5 लाख रुपये की सहायता देने और उनके इलाज का खर्च उठाने की भी बात कही गई .प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की.
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आखिर क्यों जानलेवा बन जाती है भगदड़?
चोरबागान की घटना ने एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. भगदड़ के दौरान मौत केवल लोगों के गिरने या कुचले जाने से ही नहीं होती, बल्कि अत्यधिक दबाव के कारण सांस लेने में परेशानी भी जानलेवा बन सकती है.
ऐसी घटनाओं से बचने के लिए प्रवेश और निकास के रास्ते पर्याप्त चौड़े रखना, भीड़ की संख्या पर नियंत्रण करना, पुलिस और स्वयंसेवकों की पर्याप्त तैनाती करना तथा आपातकालीन निकासी की स्पष्ट योजना बनाना जरूरी है. आयोजकों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय भी बेहद महत्वपूर्ण है.
