अवध की संत परंपरा और साहित्यिक चेतना को नई पीढ़ी से जोड़ते हुए मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के पाठयक्रम में हनुमान चालीसा को शामिल करने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही गोंडा जिले के नवाबगंज क्षेत्र के अशोकपुर गांव में जन्मे महात्मा बनादास को विश्वविद्यालय के हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही उनके नाम पर महात्मा बनादास शोधपीठ की भी स्थापना की जाएगी।
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यह घोषणा सोमवार को विश्वविद्यालय में आयोजित हिन्दी अकादमिक नवाचार- विश्वविद्यालयी प्रदेय विषयक संगोष्ठी के दौरान कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने की। उन्होंने कहा कि महात्मा बनादास केवल संत नहीं, बल्कि लोक साहित्य, साधना और विचारधारा के अद्वितीय प्रतिनिधि हैं। कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, यह विचार, परंपरा और पहचान का माध्यम है। नाथ संप्रदाय और गुरु गोरक्षनाथ की परंपरा को नए पाठ्यक्रमों से जोड़ना समय की मांग है।
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हिंदी अध्ययन बोर्ड के संयोजक प्रो. शैलेंद्र नाथ मिश्र ने स्नातक व परास्नातक स्तर के लिए तैयार नया पाठ्यक्रम कुलपति को सौंपा। पाठ्यक्रम में साहित्यिक चेतना, कौशल विकास, लोक साहित्य, आलोचना, रचनात्मक लेखन, देवनागरी लिपि व भाषा प्रौद्योगिकी जैसे विषयों को शामिल किया गया है।
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इस अवसर पर कार्य परिषद सदस्य सर्वेश सिंह, प्रो. बीपी सिंह, प्रो. आरके सिंह, प्रो. पीके सिंह, प्रो. गंगा प्रसाद शर्मा, डॉ. उपेंद्र कुमार सोनी, मनीष शर्मा, अच्युत शुक्ला सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।